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ब्रह्मयज्ञ (सन्ध्या-उपासना) विधि

सन्ध्या-विधि को क्रमशः नीचे दिया गया है, क्रमांक आप विधि का अनुसरण करके पूर्ण सन्ध्या को सीख सकते हैं।

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सन्ध्या से पूर्व ज्ञातव्य बातें

ऋषयो दीर्घसन्ध्यत्वात् दीर्घमायुरवाप्नुयुः। प्रज्ञां यशश्च कीर्तिं च ब्रह्मवर्चसमेव च।। [मनु० ४.९४] -ऋषियों ने दीर्घसन्ध्या करके लम्बी आयु, मेधा बुद्धि, यश, प्रसिद्धि और ब्रह्मतेज को प्राप्त किया है। सन्ध्या से पूर्व ज्ञातव्य बातें ब्रह्मयज्ञ – सन्ध्या-उपासना और स्वाध्याय का नाम ब्रह्मयज्ञ है। प्रतिदिन सन्ध्या-अग्निहोत्र करने के उपरान्त वेदादि मोक्षसाधक ग्रन्थों का स्वाध्याय करना चाहिये। सन्ध्या का…

2

सन्ध्यापूर्व तैयारी

शरीरशुद्धि और आसन ग्रहण करना पूर्ववर्णित दिनचर्या के अनुसार स्नान आदि से शरीर की बाह्य शुद्धि करने के उपरान्त, शुद्ध-स्वच्छ वस्त्र धारण करके, उत्तम आसन पर पद्मासन या सुखासन से बैठे। अन्तःकरण की शुद्धि राग, द्वेष, सत्य, चिन्ता, शोक आदि भावों का त्याग करके अन्तःकरण की शुद्धि करें। मन को शान्त और एकाग्र करें, क्योंकि…

3

आचमन मन्त्र

आचमन विधि – निम्न मन्त्र के उच्चारणपूर्वक, सर्वव्यापक, सुखदाता परमेश्वर का ध्यान करते हुए उससे सुख की कामना-याचना करें और उच्चारण के अनन्तर तीन बार आचमन करें। आचमन क्रिया – आचमन करने के लिए दाहिनी हथेली में इतना जल लें, जो कण्ठ के नीचे हृदय (छाती) तक पहुँचे; न उससे कम रहे न अधिक। हथेली…

4

अंगस्पर्श मन्त्र

अंगस्पर्श विधि – निम्न मन्त्रों के उच्चारणपूर्वक परमात्मा से शरीरांगों एवं इन्द्रियों की स्वस्थता, दृढ़ता एवं निर्दोषता के लिए प्रार्थना करते हुए मन्त्र वर्णित अंगों का जलयुक्त अंगुलियों से स्पर्श करें। अंगस्पर्श क्रिया – अंगस्पर्श के लिए, पात्र में से बायीं हथेली में थोड़ा जल लें, फिर दाहिने हाथ की मध्यमा और अनामिका अंगुलियों को…

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मार्जन मन्त्र

मार्जन विधि – निम्न मन्त्रों के उच्चारणपूर्वक ईश्वर से शरीरांगों की स्वस्थता, बलवत्ता और निर्दोषता की प्रार्थना करते हुए उंगुलियों से उन अंगों पर जल का मार्जन करें = जल छिड़कें = छींटे दें। मार्जन क्रिया – मार्जन के लिए, पात्र में से बायें हाथ की हथेली में थोड़ा जल लें, फिर दायें हाथ की…

6

प्राणायाम मन्त्र

प्राणायाम विधि – निम्न मन्त्रों के उच्चारणपूर्वक ईश्वर के नामों का ध्यान करें और उच्चारण के पश्चात् प्राणायाम करें। प्राणायाम करते समय भी इस मन्त्र का अर्थ विचारपूर्वक मन में जपते रहें। प्राणायाम क्रिया – प्राण = श्वास के नियन्त्रण और विस्तार करने की क्रिया को प्राणायाम कहते हैं। भीतर के वायु को नासिका से…

7

अघमर्षण मन्त्र

निम्न मन्त्रों के उच्चारणपूर्वक परमेश्वर को सृष्टिकर्ता, सृष्टिनियन्ता, सृष्टिहर्ता, सर्वव्यापक, न्यायकारी, सर्वत्र-सर्वदा सब जीवों के कर्मों का द्रष्टा मानकर, उसके इस स्वरूप का चिन्तन करते हुए पाप की ओर से अपने मन और आत्मा को हटायें तथा उधर न जाने दें। इनका चिन्तन करते हुए रात्रि-अवधि में किये गये अधों = पापों या दोषों का…

8

आचमन मन्त्र (पुनः आचमन करने हेतु)

विधि – अघमर्षण मन्त्रों के द्वारा ईश्वर के ध्यान और अपने अधों = दोषों, पापों के मर्षण = विश्लेषण पूर्वक उन्हें दूर करने के पश्चात् पूर्व आचमन मन्त्र के साथ प्रदर्शित विधि के अनुसार, निम्न आचमन मन्त्र से पुनः दाहिनी हथेली में जल लेकर तीन आचमन करें – ओं शन्नो देवीरभिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये । शंयोरभिसवन्तु…

9

मनसा-परिक्रमा मन्त्र

उद्देश्य – इन मन्त्रों में, आलंकारिक वर्णन द्वारा, संसार में प्रचलित व्यवहार के दृष्टिकोण से परमेश्वर के सर्वव्यापक , सर्वशक्तिमान् और न्यायकारी आदि स्वरूप का वर्णन किया गया है। सभी दिशाओं का परिगणन परमेश्वर के सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान होने का बोध कराने के लिए है। द्वेषभाव वाले व्यक्ति को परमात्मा के मुख में रखने का…

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उपस्थान मन्त्र

विधि – आचमन के द्वारा शरीर को, इन्द्रियस्पर्श और मार्जन मन्त्रों से इन्द्रियों को, प्राणायाम से मन को, अघमर्षण मन्त्रों से बुद्धि को और मनसापरिक्रमा मन्त्रों से चित्त को शुद्ध, शान्त और स्थिर करके उपस्थान मन्त्रों के उच्चारण और अर्थ विचारपूर्वक सर्वव्यापक ईश्वर की उपासना करते हुए उपस्थान करें अर्थात् ईश्वर के समीप बैठा हुआ…

11

गायत्रीमन्त्र

तदनन्तर गायत्री मन्त्र के उच्चारण और अर्थ विचार पूर्वक परमात्मा की स्तुति, प्रार्थना, उपासना करें – ओ३म् भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात्।। [यजु अ० ३६ । मं० ३ ] अर्थ- (ओम्) सबका रक्षक परमात्मा। सदा, सर्वत्र सबका रक्षक होने से ओम् यह परमात्मा का मुख्य नाम है, जिसके साथ…

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समर्पण

पूर्वोक्त प्रकार से सब मन्त्रों से अर्थविचारपूर्वक ईश्वर की उत्तम प्रकार से उपासना करके निम्न वाक्य का उच्चारण करते हुए प्रभु को समर्पण करें – हे ईश्वर दयानिधे ! भवत्कृपयाऽनेन जपोपासनादिकर्मणा धर्मार्थकाममोक्षाणां सद्यः सिद्धिर्भवेन्नः। अर्थ- हे ईश्वर दयानिधे ! (भवत् कृपया)आपकी कृपा से (अनेन जप + उपासना + आदि कर्मणा) हमारे द्वारा अनुष्ठित इस जप-उपासना…

13

नमस्कार मन्त्र

इसके पश्चात् निम्न मन्त्र से परमेश्वर को नमस्कार करें – ओं नमः शम्भवाय च मयोभुवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। [यजु० अ० १६. । मंत्र ४१ ] अर्थ- (शम्भवाय) मोक्ष सुखस्वरूप और मोक्षसुख को देने वाले (च) और (मयोभवाय) उत्तम सुखस्वरूप तथा उत्तम ऐहिक सुखों को देने वाले परमेश्वर…

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