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आचमन मन्त्र (पुनः आचमन करने हेतु)

विधि – अघमर्षण मन्त्रों के द्वारा ईश्वर के ध्यान और अपने अधों = दोषों, पापों के मर्षण = विश्लेषण पूर्वक उन्हें दूर करने के पश्चात् पूर्व आचमन मन्त्र के साथ प्रदर्शित विधि के अनुसार, निम्न आचमन मन्त्र से पुनः दाहिनी हथेली में जल लेकर तीन आचमन करें –

ओं शन्नो देवीरभिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये ।
शंयोरभिसवन्तु नः ।।
[यजु० अ० ३६ । मं० १२ ]

अर्थ- (देवीः) दिव्यगुणों से युक्त, सबका प्रकाशक, सबको आनन्द देने वाला (आपः) सर्वव्यापक परमेश्वर (अभि + इष्टये) मनोवांछित लौकिक सुख-आनन्द की प्राप्ति के लिए और (पीतये) पूर्णानन्द = मोक्ष की प्राप्ति के लिए तथा पूर्ण रक्षा के लिए (नः) हम को (शम्) कल्याणकारी (भवन्तु) होवे, और (नः) हम पर (शंयोः) सुख-शान्ति की (अभि-स्रवन्तु) चारों ओर से वर्षा करे। हम परमपिता परमेश्वर से यह प्रार्थना करते हैं।


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