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यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः। (यजुर्वेद अध्याय 26, मन्त्र 2)

जैसे परम पिता परमात्मा इन चार वेद रूपी कल्याणी वाणी को सभी मनुष्यों के लिए उपदेश करते हैं। वैसे हम मनुष्यों को भी करना चाहिए।

20380 › चारों वेद की मन्त्र संख्या
10522

ऋग्वेद

परमात्मा ने ऋग्वेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में अग्निऋषि जी के अंतःकरण में दिया।

प्रधान विषय के आधार पर ऋग्वेद का विषय ज्ञानकाण्ड माना जाता है।

ऋग्वेद के प्रसिद्ध मन्त्र सन्दर्भ को दो ढंग से देखा जाता है।

१. मण्डल / सूक्त / मन्त्र
इसमें 10 मण्डल हैं। दसों मण्डलों में 1028 सूक्त हैं और  1028 सूक्तों में 10552 मन्त्र हैं।

२. अष्टक / अध्याय / वर्ग / मन्त्र
इसमें 8 अष्टक हैं। आठों अष्टकों  में 64 अध्याय हैं। 64  अध्यायों में  2024 वर्ग हैं और 2024 वर्गों में 10552 मन्त्र हैं।

1976

यजुर्वेद

परमात्मा ने यजुर्वेद का  ज्ञान सृष्टि के आदि में वायुऋषि जी के अंतःकरण में दिया।

प्रधान विषय के आधार पर यजुर्वेद का विषय कर्मकाण्ड माना जाता है।

इसमें 40 अध्याय हैं और मन्त्रों की संख्या 1976 है।

1875

सामवेद

परमात्मा ने सामवेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में आदित्यऋषि जी के अंतःकरण में दिया।

प्रधान विषय के आधार पर सामवेद का विषय उपासनाकाण्ड माना जाता है।

इस वेद में मन्त्र संख्या 1875 है। सामान्य रूप से मन्त्र संख्या से ही मन्त्र संदर्भ का प्रयोग किया जाता है। परन्तु निम्न दो शाखाओं के आधार पर भी मन्त्र सन्दर्भ का प्रयोग किया जाता है।

१. कौथुम शाखा
पूर्वार्चिकः / प्रपाठक/ अर्ध प्रपाठक/ दशति / मन्त्र : 640
महानाम्न्यार्चिकः – मन्त्र : 10
उत्तरार्चिकः / प्रपाठक/ अर्ध प्रपाठक/ सूक्त / मन्त्र : 1225

२. रानायणीय शाखा
पूर्वार्चिकः / अध्याय / खण्ड / मन्त्र : 640
महानाम्न्यार्चिकः – मन्त्र : 10
उत्तरार्चिकः / अध्याय / खण्ड / सूक्त / मन्त्र : 1225

5977

अथर्ववेद

परमात्मा ने अथर्ववेद  का ज्ञान सृष्टि के आदि में अंगिराऋषि जी के अंतःकरण में दिया।

प्रधान विषय के आधार पर अथर्ववेद का विषय विज्ञानकाण्ड माना जाता है।

इस वेद में मन्त्र संख्या 5977 है। इसमें 20 काण्ड 760 सूक्त हैं। मन्त्र सन्दर्भ को निम्न ढंग से देखा जाता है।

काण्ड / सूक्त / मन्त्र

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